डिजिटल अर्काईव्ह (2008 - 2021)

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मास्तरांनी स्वत: बांधलेल्या बंदिशी

राग मालकंस (द्रुत एकताल)

काहूकी रीत काहूकी प्रीत 
बालम तुम कबसे गयो ॥
मुख छुपा के कहाँ बैठे, 
दिन दिन बीत गये
आ जावो मुख दिखायो॥

राग अडाणा (द्रुत एकताल)

रंग रंग मुखपे मत फेंको बनवारी 
ठठोरी करत मोसे निसदिन 
जागत है ननंद

ठुमऱ्या (स्वतः बांधलेल्या)

(खमाज)

तुम मत जावो मुरारी।
गोकुल जन हम व्याकुळ होवे 
निर्मल बन परजा सारी रे ॥ धृ.॥
हुई द्वारका इंद्रपुरी रे । 
गोकुलकी गत न्यारी रे 
कृष्णदास की मान बिनती रे ॥

(मिश्र मांड)

सांवरिया मत रोको मोरी वाट ॥ धृ.॥ 
कितनी सांज भई । 
मैं कैसी जावू जल भरने ।
सास ननंद मोरी राह देखत होगी
छोड़ दे मोरी बाट ॥ घृ.॥

मास्तरांनी स्वत: बांधलेल्या अनवट रागांतील बंदिशी

(जैमिनी कल्याण)

मधुबनमे आये
सबसखी रंग सुरंग खिलने ॥ धृ॥
आवत गावत
नाच नचावत
हम सब अत सुख पावे ॥1॥

(शिवकल्याण)

मायी प्रितम करो दुलहन पे 
उनबिन कछु न सुहावे॥ धृ ॥
आयी परदेससे
प्रेम कियो उन पे ॥ 1 ॥

जोड रागांतील मास्तरांच्या बंदिशी

(बसंतीकेदार)

मधुवा पिवन लागी 
गूंज रहा रे भवरा डाली डाली पे ॥ घृ ॥
कोयल कूक करत
ये भवरा गूंजत अत सुख पावे ॥ 1 ॥

(हिंडोलबहार)

मायी रे आज अपने
शुभघडी शुभदिन मंगल गाये ॥ घृ॥ =
आवत गावत, गुनी जन मिलकर
दुलहन को सहारा बंधावे ॥ 1 ॥

भास्करबुवांकडील मास्तरांच्या आवडत्या बंदिशी

राग अडाणा (त्रिताल)

मुंदरी मोरी काहे को छीन लयी छेलवा 
कार कियो मैं तोरा ॥धृ॥
हूँ तो नही इतरात रंगीले 
मान कहा अब मोरा रे॥ 1 ॥

राग सोहोनी (त्रिताल)

काहे अब तुम आये हो मेरे दवारे
सौतन संग जागे अनुरागे रस पागे
भागे ॥धृ॥
मिठी मिठी बतिया
करो ना मनरंग तुम
वही जावो जिनके छतियन सो लागे ॥ 1 ॥

दौलतखांसाहेबांकडच्या बंदिशी

(झपताल)

चमत्कार दीदार
रचो परवर दीदार
संसार विस्तार को अधतकार ॥ धृ॥
चंचल चपल चंचल चालो ॥ 1 ॥

राग मुलतानी (रूपक)

अरि तेरो ये जोवन कैसे कटेरी 
होरीके दिननमें आजरी साथ चलो मिलके, 
होरी खिलने रखवाल
ग्वाल बाल हमरे॥

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